कोशिका विभाजन
कोशिका विभाजन वह प्रक्रिया है जिसमें जनक कोशिका दो या अधिक संतति कोशिकाओं में विभाजित हो जाती है। कोशिका विभाजन कोशिका चक्र का एक भाग है। कोशिका विभाजन सामान्यत: दो प्रकार का होता है:
  1. समसूत्री विभाजन
  2. अर्धसूत्री विभाजन
समसूत्री और अर्धूसत्री विभाजनों में मुख्य अंतर है-
समसूत्रीअर्धसूत्री
समसूत्री विभाजन कायिक कोशिका में होता है।
एक कोशिका के विभाजन से दो संतति कोशिकाओं का जन्म होता है।
समसूत्री मातृ कोशिका अगुणित अथवा द्विगुणित हो सकती है।
कोशिका विभाजन में प्रत्येक नाभिक में गुणसूत्रों की संख्या समान रहती है।
यह S-अवस्था से पूर्व घटित होती है जिसमें डीएनए की प्रतिलिपि बन जाती है।
पूर्वावस्था के दौरान, समान गुणसूत्रों में युग्मन नहीं होता है।
गुणसूत्रों के आदान प्रदान के समय डीएनए में कोई विनिमय नहीं होता है।
पश्चावस्था के समय सेन्ट्रोमियर अलग हो जाते हैं। समसूत्री विभाजन के पश्चात प्रत्येक संतति कोशिका में जनक कोशिका के समान डीएनए गुण पाये जाते हैं।
अर्धसूत्री विभाजन जनन कोशिकाओं (यौन कोशिकाओं) में होता है।
अर्धसूत्री विभाजन से चार अगुणित जनन कोशिकाओं का जन्म होता है।
अर्धसूत्री मात्र कोशिका सदैव द्विगुणित प्रकृति की होती है।
प्रत्येक नाभिक में गुणसूत्रों की संख्या मातृ कोशिका से सदैव आधी होती है।
केवल अर्धसूत्री 1 अवस्था S- अवस्था से पूर्व घटित होती है।
पूर्वावस्था 1 के दौरान सभी समान गुणसूत्रों में पूर्ण युग्मन होता है।
इसमें कम से कम एक आदान प्रदान होता है।
पश्चावस्था 2 के दौरान सेन्ट्रोमियर अलग होते हैं।
अर्धसूत्री विभाजन के पश्चात, प्रत्येक संतति कोशिका में केवल आधे डीएनए गुण ही पाये जाते हैं।
जैविक अणु
  • ये जीव-जंतुओं में पाये जाने वाले रसायनिक यौगिक हैं।
  • ये जीवन निर्माण के संरचनात्मक तत्व होते हैं और जीव जंतुओं में महत्वपूर्ण कार्यों को पूरा करते है।
  • ये कार्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, सल्फर और फास्फोरस के यौगिक हैं।
लिपिड्स
लिपिड्स में उदासीन वसा, तेल, स्टेरॉयड और मोम जैसे अणु शामिल होते हैं। ये निम्नलिखित कार्य करते हैं:
  • वे जल विरोधी प्रकृति के होते हैं।
  • आघात सहन करते हैं।
  • हार्मोन क्रियाओं के जरिये से कोशिकाओं की क्रियाविधि को नियंत्रित करते हैं।
  • केन्द्रित ऊर्जा को संग्रहित करते हैं।
  • सूखने से बचाते हैं।
  • स्टेरॉयड एक प्रकार के लिपिड्स होते हैं जो कि हार्मोन और संरचनात्मक पदार्थ दोनों के रूप में कार्य करते हैं।
कार्बोहाइड्रेट
  • कार्बोहाइड्रेट कार्बन के हाइड्रेट होते हैं।
  • कार्बोहाइड्रेट एकलकों और बहुलकों दोनों के रूप में पाये जाते हैं।
  • छोटे कार्बोहाइड्रेट को शर्करा कहते हैं, जिसमें मुख्य रूप से मोनोसैकराइड (एकल शर्करा) और डाइसैकराइड (द्वि शर्करा)। बड़े कार्बोहाइड्रेटों को पॉली सैकराइड कहते हैं।
  • थोड़े समय के लिये ऊर्जा का संग्रहण करते हैं।
  • यह संरचनात्मक पदार्थ के रूप में कार्य करता है।
प्रोटीन:
प्रोटीन अमीनो अम्ल के बहुलक होते हैं, किसी जल रहित कोशिका में जैविक अणुओं के कुल भार का लगभग आधा भाग प्रोटीन से बना होता है। प्रोटीन निम्न अहम भूमिकाओं का निर्वाह करता है जैसे:
  • एन्जायम: उत्प्रेरक के रूप में
  • संरचनात्मक पदार्थ: किरैटिन के रूप में (नाखून और बालों में पाया जाने वाला प्रोटीन)
  • संकुचन: मांसपेशी ऊतकों के संकुचन एवं विश्राम की क्रिया में एक्टिन और मयोसिन फाइबर के रूप में
  • सिग्नलिंग (संदेश भेजना): इंनसुलिन प्रकार के हार्मोन शरीर में शर्करा की मात्रा को संतुलित करते हैं।
न्यूक्लिक अम्ल
  • न्यूक्लिक एसिड न्यूक्लोटाइड के बहुलक होते हैं।
  • प्रत्येक न्यूक्लोटाइड में मुख्य रूप से तीन घटक होते हैं।
  • एक गोलाकार अणु जोकि नाइट्रोजन आधार के वर्ग से संबंधित है।
  • 5-कार्बन पेनटोज सुगर
  • एक या अधिक फॉस्फेट समूह
  • डीएनए और आरएनए दो प्रकार के न्यूक्लिक अम्ल होते हैं।

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